November 24, 2021

आखिरकार कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने थामा बीजेपी का दामन

आखिरकार कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने थामा बीजेपी का दामन

रायबरेलीमनीष अवस्थी। सदर विधायक अदिति सिंह ने आखिर एक लंबे राजनैतिक उठापटक के बाद बीजेपी का दामन थाम ही लिया। अदिति सिंह अभी तक बागी विधायक के रूप में जानी जाती थी और हरदम भाजपा के पक्ष में ही अपनी वोटिंग करती थी लेकिन आज उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

बता दें कि अदिति सिंह की सबसे बड़ी पहचान क्या है? अदिति सिंह बाहुबली पूर्व विधायक विधायक स्व अखिलेश सिंह की बेटी है। 2017 में स्व अखिलेश सिंह ने अपने सदर सीट को अपनी पुत्री अदिति सिंह के नाम टिकट दिलवा कर सदन भेजा। लेकिन अदिति सिंह जीतने के लगभग एक साल बाद से ही भाजपा से नज़दीकियां बढ़ाना शुरू कर दी और उनका कांग्रेस पर लगातार पलटवार चलता रहा। इतना ही नहीं अदिति सिंह ने कांग्रेस की विधायक होकर भाजपा के पक्ष में वोटिंग की और भाजपा के विचारों को सर्वोत्तम बताया। जिससे नाराज होकर कांग्रेसी पदाधिकारियों व महासचिव प्रियंका गांधी से लेकर अन्य लोगों ने अदिति सिंह पर निशाना साधा और कहा था कि यदि भाजपा से इतना ही प्रेम है तो कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन क्यों कर लेती।

अदिति इन सब बातों को दरकिनार करते हुए लगातार कांग्रेस का विरोध करती रही और भाजपा के पक्ष में बयान बाजी भी उनकी सामने आती रही।
अभी हाल में ही कृषि कानून को लेकर भी प्रियंका गांधी पर निशाना साधा था।

पूर्व विधायक स्वर्गीय अखिलेश सिंह लगभग तीन दशक से सदर सीट से विधायक रहे हैं। शुरुआती दौर की बात किया जाए तो कांग्रेस, निर्दलीय व पीस पार्टी से उन्होंने चुनाव लड़ा और लगातार वह विजय पाते रहे लेकिन अपनी बीमारी के चलते उन्होंने अपनी बेटी अदिति सिंह को सदर सीट की कमान सौंप दी और लगकर कांग्रेस से टिकट भी दिलवा दिया। कांग्रेस सीट से उनके माथे पर जीत का सेहरा बंधा लेकिन उनका मन शुरुवात से ही भाजपा के पक्ष में रहा। इसीलिए अदिति सिंह व हरचंदपुर के विधायक राकेश सिंह को बागी विधायक के रूप में जाना जाता रहा। दोनों विधायक कांग्रेस के टिकट से विजेता हुए लेकिन शुरुआती दिनों से ही भाजपा के पक्ष में वोटिंग करते हैं और उनके विचारों से अपने विचार मिलाने की बात कहते आए।

एक दौर ऐसा आया जब सिविल लाइन चौराहे के पास कमला नेहरू की जमीन को लेकर प्रशासन और अदिति सिंह में झड़प हो रही थी तब उन्होंने कहा था कि योगी आदित्यनाथ हमारे राजनीतिक गुरु है। हम गलत नहीं होने देंगे। उस समय भी अदिति सिंह के इस बयान की खूब चर्चा हुई थी । पहले से ही माना जा रहा था कि अदिति सिंह रायबरेली से इस बार भाजपा के टिकट से मैदान में ही आएगी।

सदर सीट का समीकरण देखा जाए तो यहां यादव , पासी और ब्राह्मण मतदाता ज्यादा है लेकिन क्षत्रिय निर्णायक वोटर के रूप में माने जाते हैं। यदि भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ती है तो यादव व ब्राम्हण का वोट मुश्किल होगा। आगामी 2022 का चुनाव अदिति सिंह के लिए काफी कठिन माना जाएगा क्योंकि आदित्य सिंह ने पिछले 5 सालों में कोई ऐसा काम नहीं किया जो जनता के लिए बहुत लाभकारी रहा हो। जातीय समीकरण भी कहीं न कहीं उनके लिए नकारात्मक ही है। अभी तक सदर सीट से भाजपा का कोई प्रत्याशी जीतने में सफल नही रहा है । अब देखना यह है कि अदिति सिंह की पॉपुलरटी इस बार काम आती है या फिर अदिति को मात खाना पड़ता है।

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