October 27, 2021

क्या रायबरेली में भी बीजेपी अपनी जमीन तलाश रही ?





अमेठी:  सांसद व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का रायबरेली पर बराबर ध्यान रखना कुछ इसी बात का संकेत देता है। कोरोना महामारी हो या समान्य जनमानस की समस्यायें रायबरेली को कभी उपेक्षित नहीं किया गया, इसका कारण स्मृति है।। यद्यपि रायबरेली से सोनिया गांधी कई बार से सांसद हैं, किन्तु जैसे अमेठी को राहुल गांधी के कार्यकाल में कभी अपनें सांसद का अहसास नहीं हुआ ठीक उसी प्रकार रायबरेली के लोगों को भी कभी अहसास नहीं होता कि उनका भी कोई सांसद या प्रतिनिधि है।

मैनें वहां व्यक्तिगत ज़मीनी स्तर पर सर्वे किया तो पाया कि यहां सोनिया जी सिर्फ नाम की हमारी सांसद हैं। हम उनसे न कभी मिल सकते हैं न अपनी समस्या बता सकते हैं। सोनिया रायबरेली भी बहुत कम आती है। यहां उनके एक प्रतिनिधि रहते हैं जो अपनी मर्जी से काम करते हैं लोगों से या लोगों के सुख दुःख से उनको कभी कोई मतलब नहीं होता।

जब हमनें बताया अमेठी का भी हाल राहुल गांधी के समय ऐसे ही था किन्तु अब अमेठी के लिए शासन व प्रशासन हमेशा संवेदनसील रहता है, सांसद जी की सख़्त हिदायत रहती है कोई भी अमेठी का परेशान हुआ तो अच्छा नहीं होगा। सबसे विशेष तो यह कि उनके निजी सचिव विजय गुप्ता जी स्वंय हमेशा लोगों की बात सुनते व तत्काल समस्या का समाधान कराते हैं” तो यह बात सुनकर लोगों के आँखों में आशू आ गये, उन्होंने कहा अमेठी वास्तव में सौभाग्यशाली है जिसको सांसद नहीं एक बहन मिल गई है। हम सब तो लावारिस और उपेक्षित हैं जबकि वास्तव में सोनिया जी को चुनना जरूरी नहीं हमारी मजबूरी है। क्योंकि यहां कभी हमें स्मृति ईरानी जी जैसा कोई विकल्प नहीं मिला अथवा रायबरेली निश्चित रूप से इतिहास रच देगी।
फिलहाल हमनें देखा अमेठी की तरह रायबरेली के लोग भी बहुत मासूम, ईमानदार और सम्मानप्रिय हैं। लेकिन जहां एक तरफ कांग्रेस के नेताओं का रायबरेली बराबर न आना या कहे कि सोनिया का स्वास्थ्य ठीक न होना और न ही प्रियंका और राहुल का रायबरेली दौरा।

वही दूसरी तरह अमेठी संसद स्मृति ईरानी का लगातार अमेठी के साथ साथ रायबरेली दौरे पर रहना और वहां के विकास और स्थानिए लोगों का हल जानना। ये सब दर्शाता है कि बीजेपी की दिलचस्पी अब अमेठी के साथ साथ रायबरेली की तरफ बढ़ रही है। जिसका मकसद किले को भेदना होगा। गांधी परिवार के दूसरे सबसे बड़े किले पर विजय पाना।

लेखक- एडवोकेट कालिका प्रसाद मिश्र, अमेठी, उत्तर प्रदेश 



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