October 2, 2021

सादा जीवन उच्च विचार अपनाकर आगे बढ़ना है: डीएम

सादा जीवन उच्च विचार अपनाकर आगे बढ़ना है: डीएम

मनीष अवस्थी


रायबरेली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 152वीं जयंती 2 अक्टूबर के अवसर पर कलेक्ट्रेट के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव व विकास भवन के सभागार में मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने महात्मा गांधी जी के चित्र का अनावरण व चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये। इस मौके जिलाधिकारी सहित अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमित कुमार, डी0डी सूचना प्रमोद कुमार, एसओसी शिशिर कुमार त्रिपाठी, सीटीओ जितेन्द्र कुमार सिंह, महेश त्रिपाठी आदि अधिकारियों व कर्मचारियों ने गांधीजी व लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर कोटि-कोटि नमन किया। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि महात्मागांधी दृढ़ व्यक्तित्व के व्यक्ति थे। असल में वह एक उत्तम आत्मा के स्वामी थे। वह साधारण कपडे़ पहनते थे एवं सादा भोजन करते थे। वह केवल शब्दों पर नहीं बल्कि कार्य करने में विश्वास रखते थे। जिसका वह उपदेश देते थे उन बातों का अनुसरण भी करते थे। सादा जीवन व उच्च विचार अपनाकर आगे बढ़ें। विभिन्न समस्याओं के संदर्भ में इसका अधिगम अहिंसक था। वह धर्मभीरू थे तथा सभी के आंखों के तारे थे। उन्हें हर प्रकार के जातिवाद से नफरत थी। गांधी जी का जीवन दर्शन, समग्रता और समता का जीवन दर्शन है जिसे अपने जीवन में दृढ़ इच्छा शक्ति और संकल्प के साथ आसानी से उतारा जा सकता है।
जिलाधिकारी ने कहा कि गांधी जी ने सत्य अहिंसा का नारा ही नहीं दिया बल्कि उस पर अमल भी किया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ओडीएफ की प्रेरणा गांधी जी का ही विचार है वे मलिन बस्तियों में जाते थे और साफ-सफाई स्वयं करते थे जिसे सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के रूप में अपना रही है। गांधी जी का विचार और दर्शन भूतकाल, वर्तमान व भविष्य काल तीनों में ही प्रासंगिक है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तरह दुबले पतले शरीर की भांति लाल बहादुर शास्त्री का भी शरीर दुबला पतला था अतः यह सर्वविध थे कि किसी भी अच्छे दर्शन विचार व महानता में रंग, रूप व आकार कोई मायने नही रखता है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमित कुमार व अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी गांधी जी और लालबहादुर शास्त्री के दर्शन, विचार को विस्तार से बताया और कहा गांधी जी का ‘सादा जीवन उच्च विचार’ का सिद्धान्त आज के दौर में ज्यादा प्रासंगिक है। गांधी जी ने स्वतन्त्रता आंदोलन को जनआंदोलन बनाया। वर्तमान भौतिकतावादी दौर, पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते माहौल में भारतीय संस्कृति व सभ्यता की रक्षा करना जरूरी है। इसके लिए महात्मा गांधी जी का जीवन दर्शन देशवासियों के लिए आज और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री जी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि गांधी जी की भांति लाल बहादुर शास्त्री जी भी सादगी के प्रतीक थे। दोनों ही महापुरुषों ने सादा जीवन उच्च विचार की विचारधारा को जीवन भर अपनाया तथा देश व समाज को उन्नति व विकास के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने विकसित व समृद्ध भारत की कल्पना की थी जिसको पूरा करने की दिशा में वर्तमान प्रदेश व केन्द्र सरकार ने अनेक लाभ परक योजनाएं व कार्यक्रम संचालित कर रखे हैं ताकि ग्रामीण परिवेश में निवास करने वाली जनता भी पूरी तरह से समृद्धि व खुशहाली की जिंदगी गुजार सके। देश की दिशा और दशा को गांधी दर्शन के माध्यम से अधिक ऊंचाइयों का तक पहुंचाया जा सकता गांधी जी के भीतर देश प्रेम, मातृभूमि प्रेम, आत्म सम्मान, आत्म विश्वास, भावनात्मक एकता, राष्ट्रीय एकता और अखण्डता, अहिंसा, सहिष्णुता, भाईचारा, प्रेम का जज्बा कूट कूट कर भरा था। अमन के पुजारी के रूप में पूरे विश्व के लिए शांतिदूत थे। उन्होंने कहा कि गांधी जी की विचारधारा और दर्शन को जानें और उसे महत्व दें तथा उनके आदर्श, मूल्यों को भी याद करें व संकल्प लें। इस अवसर पर कलेक्ट्रेट के कई वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गांधी जी तथा लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके जीवन शैली एवं आदर्शों पर अपने विचार व्यक्त किये। इस मौके पर रघुपति राघव राजा राम, वैष्णव जन तो…………इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना………आदि सहित कई भजनों को प्रस्तुत कर उपस्थित जनों ने सुना और मन को मोह लिया। इस मौके पर पुलिस ऑफिस में पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार, विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया व बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह व सीएमओ डाॅ0 वीरेन्द्र सिंह ने अपने कार्यालय में भी गांधी जयंती मनायी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 कोरोना के संक्रमण से बचाव हेतु अधिक से अधिक टाकी कारण व कोरोना गाइडलाइन का पालन करना भी जरूरी है तथा साफ-सफाई व स्वच्छता पर विशेष ध्यान देकर हम कई बीमारियों से बचे सकते है। कार्यक्रम का कुशल संचालन रामेन्द्र मिश्रा व महेश त्रिपाठी द्वारा किया गया।

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